बसेरा एक बार अब

Watching Basera
फ़िल्म के शुरू में ही गीत है पूनम ढिल्लन और राजकिरण पर

पिछले सालों से राजकिरण के बारे में जितना सुना है
उसका नतीजा ये है कि मेरी नजर राजकिरण पर से हट ही नही रही है
हिप्पी कट घुंघराले बाल 
भरा हुआ चेहरा भरी हुई मुछे
गजब की मुस्कान थी बन्दे की 

ब्राउन टीशर्ट और क्रीम कलर की पेंट की फिटिंग 
गजब गजब
गीत के बैकग्राउंड में गांव,  सड़के और हरियाली वैसी ही जैसी बारिश के एक आध महीने बाद पूरे भारत मे कहीं भी देखी जा सकती है
लगता है यह गीत आपके या मेरे आसपास ही कहीं किसी जगह शूट हुआ हो


चौदह सालो में मन बदल जाते हैं आंखों के रंग बदल जाते हैं 

मैं दीवारों के रंग बदल सकती हूं 
मैं चद्दरों को बदल सकती हूँ
लेकिन इन दीवारों से इन चद्दरों से लिपटी यादों को कैसे बदलूँ ?
फ़िल्म शुरू हुई 
रेखा को बड़ी सा कुमकुम लगा देखना ऐसे लगता है जैसे घर मे दादियां हुआ करती थी 
बुआएँ हुआ करती थी 

45 मिनट की फ़िल्म तक रेखा ने शायद छह सात साड़ियां पहनी है 
हर साड़ी के रंग बेहद खूबसूरत और उन्हें पहनने का सिला 👌क्या ही कहने

जहां पे सवेरा हो बसेरा वहीं हैं 

Unhuhu

जहां पे बसेरा हो सवेरा वहीं है वहीं है वहीं है

राखी लौट आयी है....अस्पताल से 

और उनके आने के साथ ही रेखा के सब रंग उड़ गए हैं 
बड़ा सा कुमकुम भी

😔😔😔

साड़ियां भी बेरंग हो गयी है एकदम झक्क सफेद


दरअसल राखी पागल हो गयी थी
अब ठीक होकर आ गयी है 
तो उन्हें पूरी तरह ठीक होने में पूरा परिवार मंदद कर रहा है

14 साल पहले जो था 
वैसा ही सब कुछ ठहरा हुआ सा दिखाने के लिए

कभी छोटे छोटे
शबनम के कतरे

देखे तो होंगे सुबह और सवेरे 

ये शबनम रूपी नन्ही सी आँखें जागी है शब भर

जब राखी और रेखा उसी घर मे चौदह बरस के लंबे अरसे बाद मिलती है
तो दोनों की रुलाई फुट पड़ती है

लेकिन दोनों का रोना बहुत अलग है 
एकदम अलग

मैं रेखा का रोना बहुत गहरे से महसूस कर रहा हूं
और याद कर रहा हूं वे शब्द जो राखी ने गीत में कहे थे 

ये दिल की इमारत बनती है दिल से
दिलासा को छू के उम्मीदों स मिलके

धुआँ धुआँ सा रहता है, बुझी बुझी सी आँखों में
सुलग रहे हैं गीले आँसू, आग लगाती है बरसातें

भरा हुआ था दिल शायद छलक गया है सीनें में
बहने लगे हैं, सारे शिकवे, 
बड़ी ग़मगीन हैं दिल की बातें

मांगे हुए दिन हैं मांगी हुई रातें 😥


कई बार कोई कहानी
एक दम अपनी सी लगती है अक्सर
इसी तरह हर कहानी किसी न किसी और कहानी का हिस्सा होती है 

बसेरा की इस स्टोरी अब उस मोड़ पर खड़ी है
जिसके शब्द गुलजार और मराठी लेखक लीला फ़सलकर ने तो खैर लिखे ही है

मैंने परसो जो गुनाहों का देवता में धर्मवीर भारती का लिखा जो शेयर किया था 
वही सारे शब्द अब इस बसेरा में इस मोड़ पर भी आकर खड़े हो गए हैं

*औरत अपने प्रति आने वाले प्यार और आकर्षण को समझने में चाहे एक बार भूल कर जाये, लेकिन वह अपने प्रति आने वाली उदासी और उपेक्षा को पहचानने में कभी भूल नहीं करती। वह होठों पर होठों के स्पर्शों के गूढ़तम अर्थ समझ सकती है, वह आपके स्पर्श में आपकी नसों से चलती हुई भावना पहचान सकती है, वह आपके वक्ष से सिर टिकाकर आपके दिल की धड़कनों की भाषा समझ सकती है, यदि उसे थोड़ा-सा भी अनुभव है और आप उसके हाथ पर हाथ रखते हैं तो स्पर्श की अनुभूति से ही जान जाएगी कि आप उससे कोई प्रश्न कर रहे हैं, कोई याचना कर रहे हैं, सान्त्वना दे रहे हैं या सान्त्वना माँग रहे हैं। क्षमा माँग रहे हैं या क्षमा दे रहे हैं, प्यार का प्रारम्भ कर रहे हैं या समाप्त कर रहे हैं। स्वागत कर रहे हैं या विदा दे रहे हैं। यह पुलक का स्पर्श है या उदासी का चाव और नशे का स्पर्श है या खिन्नता और बेमानी का।*

हर कहानी
किसी और कहानी का हिस्सा होती है

👍👍👍👍👍

कभी पास बैठो, किसी फूल के पास
सुनो जब ये महकता है, बहोत कुछ ये कहता है
कभी गुनगुनाके, 
कभी मुस्कुराके, तो कभी रो के

चौदह साल बाद घर लौटी राखी जब देखती है कि इन चौदह साल में वो रुकी रही 
लेकिन दुनिया तेज गति पकड़ उससे काफी आगे निकल गयी है

उसका घर 
उसका परिवार
उसका पति
उसकी बहन रेखा जो अब उसके पति शशि कपूर की पत्नी है 
उसका बेटा एक नई दुनिया के अभ्यस्त हो चुके हैं 
अब राखी के आ जाने से परेशान रहने लगे हैं
वो एक बार फिर से पागल हो जाती है
लेकिन इस बार उसका पागलपन उसका समर्पण है इस परिवार के प्रति जो उसके आने से पहले बेहद खुश था

वो पागलपन को अपनाकर वापस अस्पताल लौट जाती है
ना मिटटी ना गारा, ना सोना सजाना
जहाँ प्यार देखो वहीं घर बनाना

जहां पे बसेरा हो सवेरा वहीं है


बसेरा पूरी हुई 
और पूरी हुई मेरी बसेरा स्टोरी 

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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