सुदर्शन जी
देर से उठा सूरज हड़बड़ा कर उसी आकाश में निकल आता है जिसमें कल डूबा था ! मनुष्य जीवन *तामसिक , राजसिक व सात्विक* तीन गुणों पर आधारित है *पत्थर को हिलाओ या उछालो वह वापस जमीन पर गिरता है उसी प्रकार तामसिक लोग भी ऐसे ही स्थिर होते है उन्हें कोई कितना भी ऊपर उठाने की कोशिश करे वह फिर गंदगी में पहुंच ही जाते है क्योकि तामसिक गुण स्थिरता का प्रतीक है जो लोग नशे में लिप्त रहते है उन्हें कितना भी समझाओ या सम्मान दो वह नशे की गंदगी से मुक्त नही होते क्योकि उन्हें गंदगी पसंद है उसी गंदगी में उन्हें आनन्द प्राप्त होता है किंतु मनुष्य स्वभाव गंदगी से दूर रहते है जैसे दुःखो को कोई पसंद नही करता उनसे दूर रहता है उसी प्रकार तामसिक लोगो से भी लोग दूरी बनाए रखते है* *जिस प्रकार तामसिक गुण की प्रकृति है स्थिर रहने की , उसी प्रकार राजसिक गुण की प्रकृति है गतिमान रहने की , किसी पत्थर को अगर हम उछाल दे दो वह रुकने का नाम ही नही लेता है जैसे सुखों का होना व्यक्ति को उससे बाहर नही आने देता क्योकि सुख हर कोई चाहता है किंतु सिर्फ सुख ही जीवन मे ...