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सुदर्शन जी

देर से उठा सूरज  हड़बड़ा कर   उसी आकाश  में निकल आता है     जिसमें कल डूबा   था ! मनुष्य जीवन *तामसिक , राजसिक व सात्विक* तीन गुणों पर आधारित है *पत्थर को हिलाओ या उछालो वह वापस जमीन पर गिरता है उसी प्रकार तामसिक लोग भी ऐसे ही स्थिर होते है उन्हें कोई कितना भी ऊपर उठाने की कोशिश करे वह फिर गंदगी में पहुंच ही जाते है क्योकि तामसिक गुण स्थिरता का प्रतीक है जो लोग नशे में लिप्त रहते है उन्हें कितना भी समझाओ या सम्मान दो वह नशे की गंदगी से मुक्त नही होते क्योकि उन्हें गंदगी पसंद है उसी गंदगी में उन्हें आनन्द प्राप्त होता है किंतु मनुष्य स्वभाव गंदगी से दूर रहते है जैसे दुःखो को कोई पसंद नही करता उनसे दूर रहता है उसी प्रकार तामसिक लोगो से भी लोग दूरी बनाए रखते है*        *जिस प्रकार तामसिक गुण की प्रकृति है स्थिर रहने की , उसी प्रकार राजसिक गुण की प्रकृति है गतिमान रहने की , किसी पत्थर को अगर हम उछाल दे दो वह रुकने का नाम ही नही लेता है जैसे सुखों का होना व्यक्ति को उससे बाहर नही आने देता क्योकि सुख हर कोई चाहता है किंतु सिर्फ सुख ही जीवन मे ...

रामपुरा ...एक बस्ती

!!...."बस्ती"....!! कितना प्यारा शब्द है,"बस्ती" !  वह जहां लोग बसते हैं ! जिसमें लोगों की हस्ती हो,वह हैं -"बस्ती" ! कितने प्यारे -प्यारे गीत इस पर रचे गए , हैं !"बस्ती- बस्ती" "पर्वत -पर्वत" गाता जाए "बंजारा" से लेकर यह "बस्ती दिल की बस्ती है",तक फिर उसे "स्लम या झुग्गी झोपडी" बता कर हम अपमानित क्यों कर देते हैं! "बस्ती" वह जगह है ,जहां बहुतेरी कहानियां होती है ,जहां बहूतेरी दास्तांने रहती ! "बस्ती" वह जगह जहां लोग एक दूसरे को जानते हैं ,पहचानते हैं, उनके जीवन में शरीक होते हैं ! एक छोटी सी बस्ती में भी हर त्यौहार पर घर -आंगन के बाहर रंगोली मिलती है ! हर घर से जैसे उस गांव की खुशबू आती है ,जो उसके पीछे छूट गया है ! कभी-कभी घर के बाहर बुजुर्ग लोग बैठकर जीवन के अनुभव सुनाते हैं सचमुच वह पल बढ़े रोमांचक होते है ! किसी के घर की समस्या पूरी "बस्ती"की समस्या बन जाती इस बात को वो लोग कैसे समझेंगे जो "अपार्टमेंट्स के डिब्बेदार ब्लॉक्स"में एक दूसरे से अजनबी की तरह अलग- अलग र...

बसेरा एक बार अब

Watching Basera फ़िल्म के शुरू में ही गीत है पूनम ढिल्लन और राजकिरण पर पिछले सालों से राजकिरण के बारे में जितना सुना है उसका नतीजा ये है कि मेरी नजर राजकिरण पर से हट ही नही रही है हिप्पी कट घुंघराले बाल  भरा हुआ चेहरा भरी हुई मुछे गजब की मुस्कान थी बन्दे की  ब्राउन टीशर्ट और क्रीम कलर की पेंट की फिटिंग  गजब गजब गीत के बैकग्राउंड में गांव,  सड़के और हरियाली वैसी ही जैसी बारिश के एक आध महीने बाद पूरे भारत मे कहीं भी देखी जा सकती है लगता है यह गीत आपके या मेरे आसपास ही कहीं किसी जगह शूट हुआ हो चौदह सालो में मन बदल जाते हैं आंखों के रंग बदल जाते हैं  मैं दीवारों के रंग बदल सकती हूं  मैं चद्दरों को बदल सकती हूँ लेकिन इन दीवारों से इन चद्दरों से लिपटी यादों को कैसे बदलूँ ? फ़िल्म शुरू हुई  रेखा को बड़ी सा कुमकुम लगा देखना ऐसे लगता है जैसे घर मे दादियां हुआ करती थी  बुआएँ हुआ करती थी  45 मिनट की फ़िल्म तक रेखा ने शायद छह सात साड़ियां पहनी है  हर साड़ी के रंग बेहद खूबसूरत और उन्हें पहनने का सिला 👌क्या ही कहने जहां पे सवेरा हो बसेरा वहीं हैं  Unhu...

मैं महावीर

जन्म देने वाला  यदि एक सेकंड आगे या पीछे कर लेता तो ? सिर्फ एक सेकंड ? सबको गर्व है अपने मां बाप पर  अपने घर पर  अपने देश पर  अगर ईश्वर एक सेकंड का भी अंतर कर लेता तब भी गर्व ही होता लेकिन आपकी जगह यहां कोई और होता  जो अन्य के गर्व को कमतर आंकता सोचिये आप सब ....क्योकि यह हम लोगो को बहुत पहले सोचना सीखा दिया हमारे जीवन मे आये गुरुओं ने क्या होता  अगर आप ने जन्म पास ही के मोहल्ले में लिया होता कोई और शहर या देश होता क्योकि जन्म आपके हाथ मे नही था न होगा  न रहेगा शब्द और विचार तुम्हारी पैतृक सम्पत्ति नहीं हैं।  ये हज़ारों साल की मानव-सभ्यता के विकास की देन हैं।  शब्द और विचार,  सिर्फ़ और सिर्फ़,  मनुष्य को मुक्त करने के लिए हैं, उसे संवेदनशील, विचारशील, न्यायशील, सृजनशील, स्वप्नदर्शी, स्वाभिमानी और साहसी बनाने के लिए हैं।  शब्द और विचार मानवीय सारतत्व को अभिव्यक्त और समृद्ध करने के लिए हैं!  एक सच्चा सर्जक यह करते हुए ही शब्दों, विचारों और जीवन के सौन्दर्य और आनन्द को अनुभव करता है।  इससे इतर आप किसी और प्रयोजन से शब्दो...

रचित है

धूप है छाह बनोगे ? धड़कन है जिंदगी बनोगे ? बारिश है  छतरी बनोगे ? भरोसा है, साथ चलोगे ? इशारा है  देख पाओगे ? गंगा है बनारस बनोगे ? पतंग है डोर बनोगे ? ईश्वर है  प्रार्थना बनोगे ? कठिनाई है वक्त बनोगे ? विश्वास है प्रेम बनोगे ? सैलाब है रेगिस्तान बनोगे ? गीत है आलाप बनोगे ? आशियाना है बंजारे बनोगे ? नक्काश हैं पत्थर बनोगे ? किनारा है धारा बनोगे ? मांझी है पतवार बनोगे ? इंद्रधनुष हैं रंग बनोगे ? लक्ष्य हैं इरादा बनोगे ? इमारत है नींव बनोगे ? गहराई है सतह बनोगे ? परवाज है पंख बनोगे ? सुबह है चहचाहट बनोगे ? यकीन है अनुमान बनोगे ? धरती है मिट्टी बनोगे ? रोशनी है  सितारा बनोगे ? पानी है  बहाव बनोगे ? हाइवे है  पगडंडी बनोगे ? बारिश है फुहार बनोगे ? बरगद है ओटला बनोगे ? ढपली है थाप बनोगे ? तुलसी है क्यारा बनोगे ? संगम है सरस्वती बनोगे ? अस्तित्व है विश्वास बनोगे ? आसान है कोशिश बनोगे ? सर्वक्षेष्ठ है उचित बनोगे ? सीमा है बाड़ बनोगे ? पारिजात है सुगन्ध बनोगे ? सृस्टि है रचनाकार बनोगे ? अथाह है काई बनोगे ? सम्वेदना है अहसास बनोगे ? वेद है जिल्द बनोगे ? 2024 है 1947 ब...

स्वस्तिक

और हां मैं आस्तिक हूँ ईश्वर में उतनी ही आस्था है जितना मैं अपने आपके होने को लेकर आश्वस्त हूँ मेरा राजनीतिक पक्ष भी मेरे अपनी विचारधारा के लिए है जो कांग्रेस की है मैं गांधी वादी भी हूँ मैं राहुल गांधी के प्रति आशावादी भी हूँ न की अम्बेडकर या अन्य दल के लिए जानता हूं कि पूरी दुनिया तीन विचार धाराओं पर चल रही है देश  धर्म राजनीति संगठन समाज या  एकल व्यक्ति  हर कोई इन तीन में से एक पर एकाग्र है  1 सेंटर 2 लेफ्ट 3 राइट मैं सेंटर पर हूँ 👍👍👍👍👍 सेंटर से दो शाखाएं और निकलती है 1 सेंटर लेफ्ट 2 सेंटर राईट जबकि 3  लेफ्ट से सेंटर           और  4 राइट से सेंटर के लिए          ब्रांच होती है लेकिन मैं सेंटर पर ही हूँ  👍👍👍👍👍

मैं

आस्था की ताकत प्रार्थनाओं को आसान कर देती है मैं उस परम सत्ता के होने पर पूरी तरह आश्वस हूँ  यज्ञ  हवन पूजा  पाठ कलमा नमाज  ये अपने अपने आस्था के तरीके हैं मेरी आस्था न सिर्फ उस पूर्ण अपूर्ण शक्ति में है बल्कि मैने उसे हर कहीं देखा भी है कण कण से लेकर आप जैसे विराट रूप में भी  हम सब एक ही व्यक्ति के निर्माण है कल लिखा है जो भी घट रहा है सबक है वो  अपने आपको सबक के रूप में भी घटित करता है वो  संकेतो के रूप में  हमे हर समय  हमारे हर प्रयास में  हमारे जीवन की हर अच्छी बुरी घटना में मदद करता है मैं उसे बहुत बहुत करीब से जानता हूं बहुत करीब मतलब बहुत करीब यारो बाहम गुंथे है कायनात के बिखरे टुकड़े मैं पूरी तरह आशस्त हूँ कि इस पूरी सृस्टि में दो कुछ नही है जो भी है वो सिर्फ एक है  मैं  तुम  ये  वो  से लेकर जो भी मैं देख सकता हूँ जो भी मैं सुन सकता हूं जो भी महसूस कर सकता हूँ सब एक है इस सारी सृस्टि का एक एक परम अणु  मुझसे अलग नही  सब एकाकार है आप नास्तिक हों  आप आस्तिक हों या आप स्वास्तिक हों सब सबक है जो ...