रामपुरा ...एक बस्ती

!!...."बस्ती"....!!

कितना प्यारा शब्द है,"बस्ती" !
 वह जहां लोग बसते हैं !

जिसमें लोगों की हस्ती हो,वह हैं -"बस्ती" ! कितने प्यारे -प्यारे गीत इस पर रचे गए , हैं !"बस्ती- बस्ती" "पर्वत -पर्वत" गाता जाए "बंजारा" से लेकर यह "बस्ती दिल की बस्ती है",तक फिर उसे "स्लम या झुग्गी झोपडी" बता कर हम अपमानित क्यों कर देते हैं!

"बस्ती" वह जगह है ,जहां बहुतेरी कहानियां होती है ,जहां बहूतेरी दास्तांने रहती !
"बस्ती" वह जगह जहां लोग एक दूसरे को जानते हैं ,पहचानते हैं, उनके जीवन में शरीक होते हैं !

एक छोटी सी बस्ती में भी हर त्यौहार पर घर -आंगन के बाहर रंगोली मिलती है ! हर घर से जैसे उस गांव की खुशबू आती है ,जो उसके पीछे छूट गया है !

कभी-कभी घर के बाहर बुजुर्ग लोग बैठकर जीवन के अनुभव सुनाते हैं सचमुच वह पल बढ़े रोमांचक होते है !

किसी के घर की समस्या पूरी "बस्ती"की समस्या बन जाती इस बात को वो लोग कैसे समझेंगे जो "अपार्टमेंट्स के डिब्बेदार ब्लॉक्स"में एक दूसरे से अजनबी की तरह अलग- अलग रहते हैं !

किसी के जीने मरने तक से बेखबर सामुदायिकता के अभाव में !

"बस्ती"में बच्चे आज भी सड़कों पर बच्चे खेलते हैं ,मोबाइल पर नहीं वहां आज भी लोग ठहाके मारकर निडर हो कर हँसते हैं,मुंह में दबी हंसी नहीं !

उन्हीं कुछ लोगों की वजह से "बस्ती" के दूसरे लोग बेफिक्र होकर खुशी-खुशी जीते हैं !

हां कुछ समस्या इन "बस्तियों" में भी सकती है,जैसे कि दुनिया के हर कोने में होती है !
लेकिन उनके लिए "हिन" शब्दों का प्रयोग क्यों करना ! "बस्ती"... को बस्ती ही रहने दीजिए क्योंकि वहां लोग बसते हैं !

सिर्फ गरीबी और गंदगी नहीं और हां "बस्ती" के नामों की भी खूब गहरी पड़ताल कीजिएगा !

क्योंकि हर-"बस्ती"नाम के साथ उसका इतिहास और उसकी पहचान भी जुड़ी होती है !

🙏🙏🌹🤍

 Om prakash khichi (Sen)
    "Rampura wale"
Bala ji ka bara ;Ganghi
chauraha Mandsaur.
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