मैं महावीर
जन्म देने वाला
यदि एक सेकंड आगे या पीछे कर लेता तो ?
सिर्फ एक सेकंड ?
सबको गर्व है
अपने मां बाप पर
अपने घर पर
अपने देश पर
अगर ईश्वर एक सेकंड का भी अंतर कर लेता तब भी गर्व ही होता
लेकिन आपकी जगह यहां कोई और होता
जो अन्य के गर्व को कमतर आंकता
सोचिये आप सब ....क्योकि यह हम लोगो को बहुत पहले सोचना सीखा दिया हमारे जीवन मे आये गुरुओं ने
क्या होता
अगर आप ने जन्म पास ही के मोहल्ले में लिया होता
कोई और शहर या देश होता
क्योकि
जन्म आपके हाथ मे नही था
न होगा
न रहेगा
शब्द और विचार तुम्हारी पैतृक सम्पत्ति नहीं हैं।
ये हज़ारों साल की मानव-सभ्यता के विकास की देन हैं।
शब्द और विचार,
सिर्फ़ और सिर्फ़,
मनुष्य को मुक्त करने के लिए हैं, उसे संवेदनशील, विचारशील, न्यायशील, सृजनशील, स्वप्नदर्शी, स्वाभिमानी और साहसी बनाने के लिए हैं।
शब्द और विचार मानवीय सारतत्व को अभिव्यक्त और समृद्ध करने के लिए हैं!
एक सच्चा सर्जक यह करते हुए ही शब्दों, विचारों और जीवन के सौन्दर्य और आनन्द को अनुभव करता है।
इससे इतर आप किसी और प्रयोजन से शब्दों और विचारों को बरतते हैं और सुखी-संतुष्ट-प्रसन्न रहते हैं, तो वह आत्मरति या हस्तमैथुन जैसी ही कोई चीज़ है!
उससे अलग कुछ भी नहीं!
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