ध्वनि योग
संगीत , मनुष्य को भावनात्मक परम् आनन्द की ओर ले जा सकता है
यह बात अनुभव में तो रही है
तब से जब से संगीत की समझ हुई है
इससे जुड़ाव हुआ है
मेरे परिवार के प्रभावी सदस्यों का जुड़ाव म्यूजिक से रहा है
और फिर हम लोग पारम्परिक रूप से भी संगीत से जुड़े रहे हैं
इसे मैं पारम्परिक इसलिए लिख रहा हूं
की
एक बार बहुत पहले डिस्कवरी चैनल पर कुछ इस तरह की बात किसी डाक्यूमेंट्री फ़िल्म में सुनी थी कि
भारत मे अधिकतम लोग काम करते हुए गीत संगीत सुनना पसंद करते हैं
यह फ़िल्म शायद 1990 में देखी थी
तब से ही इन लोगो की सर्चिंग का लोहा मानता रहा हूं
आप सब भी देखिए
या याद कीजिये
हम भारतीय कुछ न कुछ संगीत सुनते हुए अपना कार्य करते रहते हैं
खासकर कारीगर समुदाय के लोग
संगीत , मनुष्य को भावनात्मक परम् आनन्द की ओर ले जा सकता है
इस बोल्ड लाइन को भी एक दो बार पढिये
आप ने जब भी कोई गीत अपनी मानसिक जरूरत के लिए सुना होगा
तब की तस्वीर आप के सामने होगी
लेकिन
इतनी रात को यह सब क्यो लिख रहा हुं
मैं एक पुस्तक पढ़ रहा हुं
जो भारतीय दर्शन पर आधारित है
इसमे एक अद्भुत जिक्र आया है
भारतीय योग पद्धति में ध्वनि योग भी एक अहम स्थान रखता है
अगर उच्च कोटि के ऋषि और योगियों की माने तो हमारी सृस्टि के आरम्भ में परमपिता ने सबसे पहले ध्वनि तरंग को ही पैदा किया था
ध्वनि ही वह शक्ति है जिससे ब्रह्मांड की सृष्टि हुई
हम लोग कबीर को बहुत अच्छे से जानते हैं
कबीर ने पन्द्रहवी शताब्दी में बनारस में ध्वनि योग की शिक्षा दी थी
संगीत , मनुष्य को भावनात्मक परम् आनन्द की ओर ले जा सकता है
हर काया में नैसर्गिक संगीत मौजूद है
सिर्फ इतना ही कह सकता हूं
किताबे जीवन्त देव प्रतिमाएं होती हैं
और मुझ जैसा व्यक्ति बिना पलक झपकाए इनसे रूबरू होता रहता है
और साथ ही
वो हर बात जो मुझे क्लिक करती है
उसे अपनी डायरी में नोट करता रहता है
उपरोक्त सारी जानकारी
पाल ब्रंटन की किताब
गुप्त भारत की खोज से है
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