आज भी वैसा ही कुछ

अप्रेल 1917
लार्ड होर्डिंग्स से लार्ड चेम्सफोर्ड ने कार्यभार ग्रहण किया था
उन्होंने अपनी राय बनाने के पहले हिंदुस्तान की प्रजा
उसके नेताओ 
और यहां की राजनीतिक सामाजिक स्थितियों को समझने की लगातार कोशिश की 
अपने ढंग से 
बिना वस्तुस्थिति का आकलन किये वह कुछ खास बोलना या कहना नही चाहते थे

जब उन्होंने यहां के बारे में चीजो को अपने ढंग से पढ़ समझ लिया तब उन्होंने सम्राट को एक पत्र लिखा :

यहां हिंदुस्तान में एक शिक्षित वर्ग है
जिसका 95 प्रतिशत हमारे प्रति दुश्मनी का भाव रखता है 
और मैं जोर देकर कहता हूँ
की यहाँ हर विश्व विद्यालय का हर छात्र हमारे प्रति नफरत का भाव लेकर बड़ा हो रहा है 
फिलहाल यह सही है
की वे यहां बहुत छोटे अंश है
पर साल दर साल उनकी बढोत्तरी होती जा रही है 
और यह सहज कल्पना की जा सकती है कि उनमें अनिष्ट की अनन्त सम्भावनाये हैं

ब्रिटिश साम्राज्य के प्रति गहराते असंतोष और आक्रोश की हरारत को मापना उन जैसे शीर्षस्थ अधिकारी के लिए मुश्किल नहीं रह गया था

उन्हें हिंदुस्तान में 
"चारों तरफ खोलते उफनते  राजनीतिक चेतना के पारावार की गर्जना और प्रतिध्वनि,
अविकल और साफ सुनाई दे रही थी

इस अभूतपूर्व स्थिति का बुद्धिमता दूरदर्शिता और रचनात्मक विवेक के साथ मुकाबला करने की क्षमता उन्हें हिंदुस्तान की अंग्रेज नौकरशाही में दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही थी 

वायसराय समेत तत्कालीन नौकरशाही हर नई समस्या और स्थिति का सामना करने के लिए फाइलों के समुद्र में गोता लगाकर नजीर ढूंढने के अलावा किसी कल्पनाशील समझ और विवेक संगत निर्णय में दयनीय रूप से अक्षम थे

औपचारिक बातचीत और विचार विमर्श की लगता है कोई जानकारी ही नहीं थी 

राजनीतिक सहज बोध उन्हें छू तक नहीं गया था

अंग्रेज हिंदुस्तान में जल्द ही फूट पड़ने वाले एक ज्वालामुखी पर बैठे हैं

उपरोकर अंश :
जिन्ना एक पुनर्द्रष्टि
के 
रौलेट रिपोर्ट से खिलाफत - असहयोग आंदोलन तक 
से

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