हार की हार

पिछले कुछ सालों से अभी तक कि परिस्थिति देखकर आश्चर्य में हूं
मुझे लगता है कि इनका मैनेजमेंट लगातार जीत रहा था
कल भी इसी मैनेजिंग सिस्टम को जितना था

मैं श्योर था
लेकिन रिजल्ट आने के बाद लगातार खुद से विमर्श कर रहा हूं कि ये आखिर हुआ क्या ?
एक निष्कर्ष पर आकर ठहर गया हूं कि 
हुआ यह है कि मैनेजिंग सिस्टम की शायद अंतरात्मा जाग गयी है
कोरोना पर जो फेलियर आयी है
इसे दबाने छुपाने में कोई भी सक्षम नही है
न आईटी सेल
न दोनो प्रकार मीडिया 

लगभग देश की हर गली हर मुहल्ले में मौत पसरी हुई है
और असमय की मौतों से शायद उन लोगो का ज़मीर जाग गया है
जो इस जितने वाले सिस्टम को चला रहे हैं

यदि यह सही है 
तो अच्छी खबर ये है कि 
जल्द ही बड़ी बड़ी खबरें सुनने को मिले 

शायद हम को जर्मनी की तरह लम्बा इंतजार न करना पड़े 

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